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हिमाचल का दिल बल्ह, समस्या होगी कैसे हल
लेखक- B.R. KAUNDAL
हिमाचल सरकार से सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी (Retd. HAS) हैं
THE NEWS WARRIOR
MANDI 25 फरवरी
बल्ह हिमाचल प्रदेश का सबसे उपजाऊ व सुन्दर क्षेत्र होने के नाते हिमाचल का जि़गर माना जाता है। जिस प्रकार दिल से शरीर के हर भाग को शुध्द खून की सप्लाई होती है, उसी प्रकार बल्ह से न केवल हिमाचल को बल्कि देश के अन्य राज्यों को भी यहां के ताजे उत्पाद से भरपाई की जाती है।
यहाँ की सब्जियां, यहाँ के मेहनतकश लोगो की आर्थिकी का आधार बन चुकी है। यहाँ पर उपजे हजारों पेड़-पोधे बल्ह की सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं। आज बल्ह क्षेत्र के लोग जहां खड़े हैं, यह उन की अपनी मेहनत का फल है । किसी सरकार या व्यक्ति विशेष का इस में नहीं के बराबर योगदान रहा है।
स्वतन्त्रता के बाद हिमाचल में सरकार किसी की भी रही हो, इस क्षेत्र में राज गांधी का ही रहा। सर्वप्रथम चौधरी पीरू राम जी विधायक रहे जो बल्ह के गांधी कहलाते थे।मुख्यमंत्री जी के परम भक्त थे, लेकिन बल्ह के लिए बड़ा कुछ नहीं कर सके। जब गांधीवाद से लोग थक गये , तो लाल सलाम के विधायक श्री तुलसी राम ने उन्हे पटकनी दे कर गांधीवाद का ही अंत नहीं किया बल्कि यह भी संदेश दे दिया कि यह क्षेत्र किसी एक दल ,जाति या व्यक्ति विशेष की पपौती नहीं है।
उस के बाद लाल सलाम को लोगों ने जल्दी ही विदाई दे डाली ।
बल्ह से लालसलाम का राज़ समाप्त हुआ। उस के बाद एक और नेक आदमी ने प्रवेश किया पर नेक काम कुछ न कर पाये । केवल चौधरी के वंश को जीवित रखा। बाद में बल्ह क्षेत्र को मिले एक और महात्मा स्वरुप श्री दामोदर दास जी विधायक । नाम से तो नहीं परन्तु काम से तो महात्मा गांधी ही थे। स्वभाव के साधू ऐसे , कि बैठकों में अधिकारी ही उन की क्लास ले लेते थे। लेकिन, थे एक दम महात्मा । न किसी के बूरे में न खरे में। एक बार फिर, बल्ह के लिए बड़ा कुछ न कर पाये।
उन के जाने के बाद एक बार फिर गांधी महात्मायों के राज को पटकनी देते हुये हिविंका के एक राजकुमार श्री प्रकाश चौधरी जी बल्ह की राजनीति में प्रवेश किये । जैसा गुरु वैसा चेला। खूब धूम धड़ाका मचा कर रखा । आखिर चेले ने ही गुरु को पटकनी दे डाली ।
मुख्यमंत्री जी के हनुमान बन गये व दनदनाते रहे ।आखिर में लोगों ने उन की भी लंका जला डाली।
तभी दिल्ली दरवार से एक फकीर आया। कुछ ऐसा मंत्र फूंका कि एक बार फिर गांधी का समय लौट आया। जी हां , इस बार तो काम से ही नहीं नाम से भी गांधी का उद्गम हुआ। कितना भाग्यशाली है , हमारा बल्ह क्षेत्र । हमें हमेशा महात्मा स्वरुप गांधी ही नशीव होते रहे । कोई काम से गांधी और कोई नाम से गांधी। काम हो न हो, हमें एक महात्मा स्वरुप गांधी चाहिए। ताकि कभी किसी के लिए चुनौती न बन सके। बस यही है बल्ह की राजनीति का श्रृंगार , सभी दलों की यही है पुकार। क्या लोगों का भी यही है विचार ?
बल्ह एक मेहनतकश व विकासशील लोगों का क्षेत्र है, विकास तो होता ही रहता है। आगे भी होता ही रहेगा। खुश होना चाहिए कि बल्ह हवाई अड्डा बनने जा रहा है
अब न रहेंगे खेत, न रहेंगे खलियान।
न रहेंगे पेड़ और न बचेंगे किसान। ।
ऐसा है हमारा बल्ह क्षेत्र महान।
जय जवान परन्तु हार गया किसान।।
जय हिमाचल।
नोट – यह लेखक के निजी विचार हैं